नई दिल्ली:– इजरायली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सत्ता का बड़ा हस्तांतरण हुआ है। शिया धर्मगुरु अलीरेजा अराफी को देश का नया अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है। 1959 में जन्मे अराफी वर्तमान में ‘बसिज’ के प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के प्रभावशाली सदस्य हैं। वे इससे पहले अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और कोम के इमाम जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
फिलहाल, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने उन्हें अंतरिम कमान सौंपी है, जबकि स्थायी सर्वोच्च नेता का चुनाव आने वाले दिनों में किया जाएगा। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच अराफी की नियुक्ति को ईरान की नई रक्षा और कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
कौन हैं अलीरेजा अराफी ?
अलीरेजा अराफी ईरान के वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं और देश की धार्मिक व राजनीतिक व्यवस्था में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। उनका जन्म साल 1959 में ईरान के यज़्द प्रांत के मेबोद शहर में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध धार्मिक परिवार से आते हैं और पिछले कई दशकों में ईरान के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में अहम पदों तक पहुंचे हैं। अराफी को दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का करीबी माना जाता रहा है। वे उन प्रभावशाली धर्मगुरुओं के समूह का हिस्सा हैं, जिनकी ईरान की सत्ता व्यवस्था में मजबूत पकड़ मानी जाती है।












