नई दिल्ली:– आज यानी 4 मई 2026 से अग्नि नक्षत्र शुरू हो गया है। भगवान मुरुगन को समर्पित अग्नि नक्षत्र ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत का प्रतीक बताया गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह मई-जून के महीने में पड़ता है। इस अवधि को अग्नि नक्षत्र उत्सव के रूप में मनाया जाता है और तमिलनाडु राज्य में इसे बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।
अग्नि नक्षत्र 2026 कब से कब तक है
हिंदू पंचांग के अनुसार, यह मई-जून के महीने में पड़ता है इस बार अग्नि नक्षत्र (Agni Nakshatra) अग्नि नक्षत्र की शुरुआत के साथ अगले 25 दिनों तक भीषण गर्मी का प्रभाव देखने को मिलेगा। इस दौरान कुछ पारंपरिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।04 मई से शुरू होकर 28 मई तक चलेगा।
क्या है अग्नि नक्षत्र ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अग्नि नक्षत्र वो खास समय होता है जब सूर्य देव कृतिका नक्षत्र के क्षेत्र में संचरण करते हैं। चूंकि कृतिका नक्षत्र का संबंध अग्नि तत्व से होता है, इसी कारण से इस समय को ‘अग्नि नक्षत्र’ कहा जाता है।
दक्षिण भारत में ये समय भगवान मुरुगन की उपासना के लिए खास माना जाता है। ज्योतिष अनुसार अग्नि नक्षत्र में मौसम काफी गर्म हो जाता है जिस कारण इस दौरान स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।
अग्नि नक्षत्रम कहाँ मनाया जाता है?
अग्नि नक्षत्रम का उत्साह दक्षिण भारत में खासतौर पर, तमिलनाडु राज्य में इसे बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।दक्षिण भारत में, इस अवधि को अशुभ माना जाता है और यह मध्य वर्ष के चरम मौसम का प्रतीक है, इसलिए इसे अक्सर ‘अग्नि नक्षत्र दोष’ कहा जाता है। इस दौरान दक्षिण भारत के भगवान मुरुगन मंदिर में विशेष आयोजन किए जाते हैं। इस अवधि को कथिर और करतारी भी कहा जाता है, जिसमें विवाह या अन्य शुभ अवसर नहीं मनाए जाते हैं।
अग्नि नक्षत्र के दौरान क्या करना चाहिए ?
इस दौरान भगवान मुरुगन की पूजा करनी चाहिए।
मंत्र जाप और ध्यान करना चाहिए।
इस दौरान जलदान करना चाहिए।
सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
अग्नि नक्षत्र में क्या नहीं करना चाहिए?
अग्नि नक्षत्र में अत्यधिक धूप में जाने से बचना चाहिए क्योंकि इस दौरान की धूप सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकती है।
इस दौरान तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए जिससे शरीर हाइड्रेट रहे।
हल्का भोजन करना चाहिए जिससे शरीर को भोजन पचाने में दिक्कत न आए।
इस समय सूती वस्त्र पहनने चाहिए।
अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इस समय विवाह,
मुंडन संस्कार और उपनयन संस्कार जैसे शुभ कार्यों को करने से भी बचना चाहिए।













