नई दिल्ली:– ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, केवल गुण मिलान ही विवाह की सफलता तय नहीं करता। कुंडली में मौजूद दोष और ग्रहों की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही वजह है कि कई बार 30 से ज्यादा गुण मिलने के बाद भी शादीशुदा जीवन में परेशानियां बनी रहती हैं।
केवल गुण मिलान नहीं, ग्रह स्थिति भी जरूरी
कुंडली मिलान में कुल 36 गुण होते हैं, जो मानसिक और भावनात्मक अनुकूलता को दर्शाते हैं। लेकिन सफल वैवाहिक जीवन के लिए सातवें भाव (विवाह भाव), आठवें भाव और ग्रहों की स्थिति को भी देखा जाता है। यदि विवाह का स्वामी ग्रह कमजोर हो, तो रिश्ते में स्थिरता की कमी आ सकती है।
ज्योतिष शास्त्र में नाड़ी दोष को गंभीर दोषों में गिना जाता है। यदि वर और वधू की नाड़ी समान हो, तो इसे नाड़ी दोष कहा जाता है। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और संतान सुख में बाधा आ सकती है। कई बार यह पति-पत्नी के बीच विचारों के टकराव का कारण भी बनता है।
मांगलिक दोष का प्रभाव
मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस और क्रोध का कारक माना गया है। यदि एक साथी मांगलिक हो और दूसरा न हो, तो दोनों के स्वभाव और व्यवहार में असंतुलन पैदा हो सकता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इससे विवाद और तनाव बढ़ने की संभावना रहती है।
नाड़ी दोष के लिए बताए गए उपाय
रोजाना महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
क्षमता अनुसार सोने का दान करने की सलाह दी जाती है।
जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करना लाभकारी माना गया है।
योग्य ज्योतिषाचार्य से पूजा-पाठ और दोष निवारण करवाया जा सकता है।
मांगलिक दोष के उपाय
विवाह से पहले कुंभ विवाह या पीपल विवाह की परंपरा कुछ जगहों पर निभाई जाती है।
मंगलवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना शुभ माना जाता है।
ज्योतिष के अनुसार, मांगलिक का विवाह मांगलिक से करने पर दोष का प्रभाव कम हो सकता है।
क्या कहते हैं ज्योतिष विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गुण मिलान के आधार पर विवाह का फैसला नहीं करना चाहिए। कुंडली के अन्य पहलुओं, स्वभाव, पारिवारिक समझ और आपसी सामंजस्य को भी महत्व देना जरूरी है।













