नई दिल्ली:– पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी एक ऐसी समस्या सामने आ रही है, जिसे अक्सर लोग शर्म या झिझक की वजह से नजरअंदाज कर देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अगर स्पर्म यानी वीर्य का रंग सफेद की जगह पीला दिखाई देने लगे, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। कई मामलों में यह सामान्य कारणों से होता है, लेकिन कई बार यह शरीर में छिपे गंभीर संक्रमण, प्रोस्टेट की बीमारी या सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) का संकेत भी हो सकता है। समय रहते जांच और इलाज न कराया जाए तो संक्रमण पार्टनर तक भी फैल सकता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार सामान्य रूप से वीर्य का रंग हल्का सफेद या ग्रे होता है, जो अच्छी रिप्रोडक्टिव हेल्थ की निशानी माना जाता है। लेकिन जब वीर्य में पीलेपन के साथ बदबू, जलन, दर्द या पेशाब में परेशानी जैसी शिकायतें होने लगें, तो यह शरीर में इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार कई बार लंबे समय तक इजैक्युलेशन न होने, शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन या विटामिन-B कॉम्प्लेक्स सप्लीमेंट लेने से भी स्पर्म हल्का पीला दिखाई दे सकता है। ऐसी स्थिति आमतौर पर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है।
क्टरों का कहना है कि अगर पीले स्पर्म के साथ तेज बदबू आने लगे, पेशाब करते समय जलन हो, जननांगों में दर्द महसूस हो या बुखार आए, तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या बैक्टीरियल संक्रमण का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया पुरुषों के रिप्रोडक्टिव सिस्टम को प्रभावित करते हैं, जिससे वीर्य का रंग और उसकी बनावट बदल जाती है। कई मामलों में गोनोरिया और क्लैमाइडिया जैसी STD भी इसकी वजह बनती हैं, जो असुरक्षित यौन संबंधों से तेजी से फैल सकती हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खराब लाइफस्टाइल भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर बुरा असर डालती है। धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, नींद की कमी, तनाव और असंतुलित खानपान से वीर्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। बढ़ती उम्र के साथ भी वीर्य के रंग में हल्के बदलाव आना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर यह बदलाव लगातार बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
डॉक्टर आमतौर पर ऐसी स्थिति में यूरिन टेस्ट, सीमन एनालिसिस और इंफेक्शन स्क्रीनिंग जैसे टेस्ट करवाते हैं, ताकि बीमारी की सही वजह पता चल सके। सही समय पर इलाज और दवाओं से ज्यादातर मामलों में यह समस्या पूरी तरह ठीक हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संक्रमण की वजह से वीर्य का रंग बदल रहा है और व्यक्ति इलाज नहीं करवाता, तो यह संक्रमण पार्टनर तक भी पहुंच सकता है। इसलिए सुरक्षित यौन संबंध, साफ-सफाई, नियमित हेल्थ चेकअप और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।









