कोरबा :–राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ( नालसा ) नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के मार्गदर्शन में संचालित “सामुदायिक मध्यस्थता: मुकदमा मुक्त ग्रामीण भारत” अभियान अंतर्गत चयनित सामुदायिक मध्यस्थों का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में उच्च न्यायालय बिलासपुर की वरिष्ठ अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी एवं अधिवक्ता सुश्री आकांक्षा जैन ने प्रतिभागियों को मध्यस्थता की प्रक्रिया, विवाद निवारण के वैकल्पिक उपाय, संवाद कौशल, सक्रिय श्रवण, अहिंसक संचार, सामुदायिक मध्यस्थों की भूमिका तथा नैतिक दायित्वों सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान स्किया।
कार्यक्रम में कोरबा एवं समीपवर्ती जांजगीर चांपा जिले के ग्रामीण क्षेत्र से चयनित सामुदायिक मध्यस्तों तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्यों पैरा लीगल वालंटियर्स ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाले विवादों के शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण समाधान मध्यस्थता की सीमाएं ,समझौता प्रक्रिया तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं के बीच निष्पक्ष भूमिका निर्वहन संबंधी व्यावहारिक जानकारी दी गई।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा द्वारा बताया गया कि प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों का आपसी संवाद एवं सहमति के माध्यम से निराकरण कर न्यायालयों में अनावश्यक वादों ( मुकदमों )की संख्या कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

यह पहल न केबल त्वरित एवं सुलभ न्याय की अवधारणा को सशक्त करेगी,बल्कि “मुकदमा मुक्त ग्रामीण भारत” के लक्ष्य को सरकार बनाने की दिशा में भी प्रभावी योगदान देगी।









