नई दिल्ली : बात जैसे ही ईएमआई की आती है, तो आम तौर पर यही लगता है कि आपने कोई बड़ा सामान खरीदा होगा. यानि आपने कोई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स या फिर फर्नीचर का सामना खरीदा होगा. लेकिन आज की पीढ़ी इससे भी आगे बढ़ चुकी है. वह तो शाम के खाने का पेमेंट भी ईएमआई पर करना पसंद करती है.
जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना. फ्राइड चिकन और फास्ट फूड के आइटम भी अब EMI पर उपलब्ध हैं. शायद इसकी जानकारी बहुत लोगों को नहीं होगी. भारत में भी इस ट्रेंड की शुरुआत हो चुकी है. लेकिन आइए सबसे पहले मलेशिया की बात कर लेते हैं.
मलेशिया में केएफसी को चलाने वालों में से एक ने इस सेवा की शुरुआत की है. उन्होंने बाय नाउ पे लेटर का बोर्ड लगाया. और उन्होंने उनके यहां से खरीदे जाने वाले सभी फूड आइटम पर यह सुविधाएं प्रदान की हैं.
बाय नाउ पे लेटर का मतलब यह है कि अगर आपके पास पैसे नहीं हैं तो भी आप खरीदारी कर सकते हैं, इस सुविधा के तहत फाइनेंस कंपनी आपको छोटी अवधि का कर्ज देती हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक केएफसी ने यह निर्णय अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित करने के लिए ऐसा किया है. उनके अनुसार केएफसी चाहती है कि लो इनकम ग्रुप वाले भी उनकी सुविधा का फायदा उठा सकें.
वैसे, मलेशिया में केएफसी के इस एड पर खूब बवाल मचा. इसके बाद कंपनी को अपना एड हटाना पड़ा. लेकिन तब तक यह संदेश फैल चुका था. कंपनी ने कहा कि यदि गैजेट्स और फर्नीचर आइटम पर ईएमआई उपलब्ध हैं, तो डेली फूड आइटम पर इसे क्यों नहीं दिया जा सकता है.
मलेशिया के सेंट्रल बैंक ने बाय नाउ, पे लेटर सेवा की निंदा की है. उनके अनुसार मलेशिया में करीब 70 लाख लोग लो-इनकम ग्रुप में आते हैं. फूड की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, इसलिए आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
आपको बता दें कि इस तरह की सेवा अमेरिका में भी उपलब्ध है. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में डोरडैश ने केएलएआरएनए के साथ एक समझौता किया है. यह एक स्वीडिश फिनटेक फर्म है. कंपनी फूड बिल को चार हिस्सों में बांटने का विकल्प देती है. आप उसे इंस्टॉलमेंट में भुगतान कर सकते हैं.
भारत में भी इस ट्रेंड की शुरुआत हो रही है. मार्च और जून 2024 के बीच भारत में क्रेडिट कार्ड के जरिए 2.6 लाख करोड़ रु. से बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रु. का पेमेंट हुआ. 2019 से तुलना करेंगे, तो 24 प्रतिशत वार्षिक गति से इसमें इजाफा हो रहा है. जेन जेड में तो ईएमआई या बाय नाउ पे लेटर का क्रेज बढ़ता जा रहा है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि यह ट्रेंड खतरनाक है. क्योंकि जिनके पास पेमेंट की कैपेसिटी नहीं है, वे भी इसका फायदा उठा रहे हैं. यही वजह है कि क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. 2023 में डिफॉल्ट की संख्या 1.7 फीसदी थी, जबकि 2024 में 1.8 फीसदी तक हो गई. आरबीआई ने बाय नाउ पे लेटर पर नियंत्रण लगाने की कोशिश की है. लेट फीस को कैप किया गया है.
वित्तीय जानकारों का कहना है कि जब लोग फ़ास्ट फ़ूड और किराने के सामान के लिए पैसे देना शुरू करते हैं, तो यह सिर्फ़ भुगतान के तरीकों में बदलाव से कहीं ज़्यादा संकेत देता है – यह गहरी आर्थिक दरारों को उजागर करता है.













