तिरुमाला: तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े होने वाले भक्तों के लिए खुशखबरी है. अब उन्हें निर्बाध दर्शन की सुविधा मिलेगी, क्योंकि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है. टीटीडी जल्द ही गूगल के साथ एक समझौता करने की तैयारी में है, जिसके तहत गूगल अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराएगा. इससे दर्शन प्रक्रिया तेज और सुगम होगी. श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
क्या होगा फायदाः
टीटीडी और गूगल के बीच एक सप्ताह से दस दिनों में एमओयू होने की उम्मीद है. TTD का लक्ष्य AI को अपने संचालन के कई पहलुओं में एकीकृत करना है. जिसमें आवास, कतार प्रबंधन और अन्य आवश्यक सेवाएं शामिल हैं. पीक सीजन और आगंतुकों के रुझान पर डेटा का विश्लेषण करके, TTD भीड़भाड़ को रोकने और तीर्थयात्रियों के अनुभव को बढ़ाने के लिए पहले से ही आवश्यक व्यवस्था कर सकता है. AI, अलग-अलग भाषा के भक्तों का मार्गदर्शन करने में भी सहायता करेगा.
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षाः
एक बार जब Google की AI तकनीक तिरुमाला में लागू हो जाएगी, तो भक्त Google मैप्स से भीड़ की स्थिति की जांच कर सकेंगे. कमरे की उपलब्धता, केंद्रीय पूछताछ कार्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, अन्ना प्रसादम केंद्र और कल्याणकट्टा के बारे में जानकारी मोबाइल नोटिफिकेशन के माध्यम से सुलभ होगी. जिससे लोगों से पूछताछ करने की आवश्यकता कम हो जाएगी. इस प्रणाली के लागू होने के बाद शेड में लंबे समय तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता कम हो जाएगी.
गूगल तिरुमाला में रणनीतिक स्थानों पर एआई-संचालित कैमरे लगाएगा, जिससे सुरक्षा उपाय बढ़ेंगे. ये कैमरे सतर्कता कर्मचारियों और पुलिस को संदिग्ध गतिविधि पर नज़र रखने, अपराधियों की पहचान करने और दलालों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद करेंगे, जिससे भक्तों को धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा.
भक्तों के लिए स्थायी आईडीः
AI परियोजना सफल साबित होती है, तो टीटीडी प्रत्येक भक्त के लिए एक स्थायी आईडी शुरू करने की योजना बना रहा है. यह आईडी तीर्थयात्रियों को दर्शन, आवास और अन्य सेवाओं को निर्बाध रूप से बुक करने में सक्षम बनाएगी. टीटीडी प्रत्येक आगंतुक की बुकिंग का रिकॉर्ड बनाए रखेगा, जिससे सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा. इसके अतिरिक्त, भक्त शिकायत दर्ज करने, प्रतिक्रिया देने और अधिकारियों के साथ सुझाव साझा करने में सक्षम होंगे. जिससे जवाबदेही में सुधार होगा.













