नई दिल्ली:– भारत की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में देश की जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये की भारी कटौती की घोषणा की है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार का यह साहसिक फैसला आम आदमी को महंगाई के बोझ से बचाने के लिए लिया गया है।
मंत्री ने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश के बिगड़ते आर्थिक हालातों की तुलना करते हुए स्पष्ट किया कि भारत ने वैश्विक दबाव के बावजूद अपनी स्थिति को बेहतर तरीके से मेंटेन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही लॉकडाउन की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत में ऐसी कोई भी गुंजाइश नहीं है और नागरिक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
लॉकडाउन की अफवाहों का खंडन
विपक्ष और कुछ नेताओं द्वारा फैलाई जा रही लॉकडाउन की खबरों पर कड़ा रुख अपनाते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में फिलहाल लॉकडाउन की दूर-दूर तक कोई गुंजाइश नहीं है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भले ही स्मार्ट लॉकडाउन की घोषणा हुई हो लेकिन भारत में व्यापार, स्कूल और कार्यालय पहले की तरह सामान्य रूप से सुचारू रूप से चलते रहेंगे। उन्होंने जनता से किसी भी भ्रम में न आने की अपील की और कहा कि सरकार पल-पल बदलते अंतरराष्ट्रीय हालातों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है ताकि सुरक्षा सुनिश्चित रहे।
ईंधन की कीमतों में बड़ी राहत
सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये से घटाकर अब केवल 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है जिससे सीधे 10 रुपये की बचत होगी। डीजल पर लगने वाली पूरी ड्यूटी को अब हटाकर शून्य कर दिया गया है जिससे माल ढुलाई की लागत कम होने और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर लगाम लगने की उम्मीद है। वित्त मंत्री के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बावजूद जनता को सुरक्षा देने के लिए यह तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
पड़ोसी देशों से आर्थिक तुलना
निर्मला सीतारमण ने सदन को बताया कि पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें 200 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं और वहां रातोरात कीमतों में 20 प्रतिशत का इजाफा होने से पेट्रोल 321 रुपये लीटर बिक रहा है। बांग्लादेश में भी बिजली और तेल की भारी कमी के कारण विश्वविद्यालय बंद कर दिए गए हैं और वहां घरेलू उपभोक्ताओं के लिए घंटों की रोटेशनल पावर कट की समस्या बनी हुई है। भारत ने अपने नागरिकों को इन वैश्विक समस्याओं से बचाने के लिए बहुत ही सावधानीपूर्वक आर्थिक प्रबंधन किया है ताकि तेल और फर्टिलाइजर्स जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनी रहे।
रिफाइनरीज के लिए नए निर्देश
वित्त मंत्री ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि जो रिफाइनरीज तेल का निर्यात कर रही हैं उन्हें सबसे पहले भारतीय नागरिकों की घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्यात करके पैसा कमाना अच्छा है लेकिन मौजूदा संकटपूर्ण वैश्विक हालातों में देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय आपूर्ति को सुनिश्चित करना कंपनियों का पहला कर्तव्य है। भारत में मौजूद रिफाइनरीज पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल ला रही हैं और उसे रिफाइन करके देश की मांग पूरी करने के साथ-साथ विदेशों में भी अपना बिजनेस कर रही हैं।
राजस्व का नुकसान और प्रतिबद्धता
एक्साइज ड्यूटी में इतनी बड़ी कटौती करने से सरकार को निश्चित रूप से राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा लेकिन प्रधानमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि आम नागरिक पर कोई बोझ न पड़े। पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा होने के बावजूद सरकार ने जनता की सुविधा के लिए कल रामनवमी के दिन यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार सक्रिय है और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भी देश की आर्थिक स्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।













