नई दिल्ली:– सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। विशेषकर सावन का पहला सोमवार शिवभक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन लाखों श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार को विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
भगवान शिव को ‘भोलेनाथ’, ‘महाकाल’, ‘देवों के देव’ और ‘भूतनाथ’ जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। उन्हें भूत-प्रेत, पिशाच, यक्ष, गंधर्व और विभिन्न दिव्य गणों का स्वामी भी माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव के असंख्य गण थे, जो हर परिस्थिति में अपने आराध्य की रक्षा के लिए तत्पर रहते थे। इनमें कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें अत्यंत शक्तिशाली सेनापति और दिव्य योद्धा माना गया है।
आइए जानते हैं शिव पुराण में वर्णित भगवान शिव के चार सबसे बलशाली गणों और उनकी अद्भुत कथाओं के बारे में।
- काल भैरव – शिवधामों के दिव्य रक्षक
भगवान शिव के सबसे प्रमुख और शक्तिशाली गणों में काल भैरव का नाम सबसे पहले लिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव को स्वयं भगवान शिव का उग्र स्वरूप माना जाता है। उन्हें काशी, उज्जैन, केदारनाथ और अन्य प्रमुख शिवधामों का रक्षक माना जाता है।
मान्यता है कि काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन से पहले काल भैरव के दर्शन करना शुभ माना जाता है। उन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और कई अन्य ज्योतिर्लिंगों के आसपास भी काल भैरव के मंदिर स्थापित हैं। माना जाता है कि वे दुष्ट शक्तियों से शिवधामों की रक्षा करते हैं और भक्तों की सुरक्षा करते हैं। - वीरभद्र – शिव के क्रोध से जन्मे महायोद्धा
भगवान शिव के सबसे पराक्रमी सेनापतियों में वीरभद्र का विशेष स्थान है। उनकी उत्पत्ति दक्ष प्रजापति के यज्ञ से जुड़ी प्रसिद्ध कथा से होती है।
शिव पुराण के अनुसार, जब दक्ष प्रजापति ने अपने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया और माता सती ने यह अपमान सहन न कर योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए, तब भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे। उन्होंने अपनी जटाएं पृथ्वी पर पटकीं, जिनसे वीरभद्र प्रकट हुए।
वीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ को ध्वस्त कर दिया और दक्ष प्रजापति का सिर धड़ से अलग कर दिया। बाद में भगवान शिव के शांत होने पर दक्ष को बकरे का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया गया। वीरभद्र को भगवान शिव के सबसे शक्तिशाली और रौद्र गणों में गिना जाता है।
- घंटाकर्ण – अद्भुत योद्धा और शिवभक्त
शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में घंटाकर्ण का उल्लेख भगवान शिव के वीर और शक्तिशाली गण के रूप में मिलता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, वे यक्षराज कुबेर के सहयोगी भी थे, जबकि कुछ परंपराओं में उन्हें काल भैरव का स्वरूप माना गया है।
घंटाकर्ण को युद्ध कौशल, अदम्य साहस और शिवभक्ति के लिए जाना जाता है। धार्मिक कथाओं में उनका वर्णन ऐसे योद्धा के रूप में मिलता है, जो अपने स्वामी के आदेश के लिए किसी भी शक्ति से टकराने का साहस रखते थे।
- नंदी – शिव के वाहन और गणों के प्रमुख
भगवान शिव के सबसे प्रिय और सर्वोच्च गण नंदी महाराज हैं। उन्हें केवल शिव का वाहन ही नहीं, बल्कि समस्त गणों का प्रमुख भी माना जाता है।
शिव पुराण के अनुसार, नंदी ऋषि शिलाद के पुत्र थे। जन्म के समय उनकी आयु बहुत कम बताई गई थी। अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए ऋषि शिलाद ने कठोर तप किया। नंदी ने भी भगवान शिव की घोर आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अमरत्व प्रदान किया और अपना वाहन एवं गणों का प्रधान बना लिया।
मान्यता है कि नंदी शिव के परम भक्त हैं और भक्तों की प्रार्थना भगवान शिव तक पहुंचाते हैं। इसी कारण हर शिव मंदिर में शिवलिंग के ठीक सामने नंदी की प्रतिमा स्थापित होती है। श्रद्धालु आज भी नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहकर उसे भगवान शिव तक पहुंचाने की प्रार्थना करते हैं।
भगवान शिव के गण क्यों हैं खास?
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव के गण केवल योद्धा नहीं थे, बल्कि वे धर्म की रक्षा, अधर्म का नाश और अपने आराध्य की सेवा के लिए सदैव समर्पित रहते थे। इनमें भूत, प्रेत, पिशाच, यक्ष, गंधर्व, दैत्य और अनेक दिव्य शक्तियां शामिल थीं। भगवान शिव ने कभी किसी के रूप, जाति या स्वरूप के आधार पर भेदभाव नहीं किया, इसलिए उनके गणों में हर प्रकार के प्राणी शामिल बताए गए हैं। यही कारण है कि भगवान शिव को भूतनाथ और गणों के स्वामी भी कहा जाता है।
सावन सोमवार पर क्यों याद किए जाते हैं शिव के गण?
धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव के साथ उनके गणों का भी स्मरण करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने के साथ नंदी महाराज और काल भैरव की पूजा भी शुभ मानी जाती है। श्रद्धालु मानते हैं कि भगवान शिव के गण भक्तों की रक्षा करते हैं और उनकी मनोकामनाओं को महादेव तक पहुंचाते हैं।








