नई दिल्ली:– हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन या किसी भी शुभ कार्य के दौरान कलावा यानी रक्षासूत्र बांधना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह लाल और पीले रंग का पवित्र धागा देवी-देवताओं की कृपा और सुरक्षा का प्रतीक है। कलावा ना सिर्फ सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि नजर, बुरी शक्तियों और नकारात्मकता से भी रक्षा करता है। लेकिन इस कलावे को बांधने और उतारने की विधि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कलावा बांधने की सही विधि और नियम
शास्त्रों के अनुसार, पुरुष और कुंवारी कन्याओं को कलावा दाहिने हाथ में बांधना चाहिए, जबकि विवाहित महिलाओं को बाएं हाथ में बांधना शुभ होता है। कलावा बांधते समय एक सिक्का या रुपया मुट्ठी में लेकर दूसरे हाथ को सिर पर रखें। कलावा को कम से कम 3, 5 या 7 बार हाथ में लपेटना चाहिए। बांधने के बाद मुट्ठी में रखी दक्षिणा कलावा बांधने वाले ब्राह्मण या पुरोहित को दे दें।
कलावा बांधते समय इस मंत्र का जाप जरूर करें:
‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥’
इस मंत्र से कलावा और अधिक शक्तिशाली हो जाता है और व्यक्ति पर देवताओं की विशेष कृपा बनी रहती है।
कलावा उतारने की सही विधि
कलावा उतारने के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। कलावे को कभी भी कैंची या चाकू से नहीं काटना चाहिए। इसे हाथ से ही सावधानीपूर्वक खोलना चाहिए। उतारने के बाद पुराने कलावे को फेंकना या कूड़े में डालना वर्जित है।सही विधि यह है कि पुराने कलावे को पीपल के पेड़ के नीचे रख दें या किसी बहते शुद्ध पानी में प्रवाहित कर दें। इससे कलावे की सकारात्मक ऊर्जा प्रकृति में विलीन हो जाती है और कोई अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है।
कैंची से कलावा काटने के नुकसान
बहुत से लोग पूजा के बाद कलावे को कैंची से काटकर फेंक देते हैं। शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, यह कार्य अशुभ माना जाता है। कलावा एक पवित्र रक्षासूत्र है। इसे काटने से उसकी सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे आर्थिक हानि, स्वास्थ्य संबंधी समस्या, पारिवारिक कलह या अचानक बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए कलावे को कभी भी काटना नहीं चाहिए।
कलावा कितने दिनों तक पहनना चाहिए
कलावा सामान्य तौर पर 21 दिनों तक ही पहनना चाहिए। 21 दिन बाद इसमें सकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। इसके बाद नया कलावा अवश्य बंधवाना चाहिए। पुराने कलावे को कभी भी दोबारा नहीं बांधना चाहिए, क्योंकि इसमें अब रक्षा शक्ति नहीं बचती और इससे नकारात्मक ऊर्जा भी आ सकती है।













