नई दिल्ली : आहार और जीवनशैली में गड़बड़ी को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता रहा है। इससे न सिर्फ समय से पहले कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही ये असमय मौत का भी कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं आप जिस तरह की चीजों का सेवन करते हैं उसका सेहत पर सीधा असर होता है। अगर आप बीमारियों से बचे रहना और लंबी आयु चाहते हैं तो आहार में सुधार सबसे जरूरी है।
कुछ शोधकर्ताओं ने बताया कि जो लोग ‘मेडिटेरियन डाइट (Mediterranean Diet) का सेवन करते हैं वह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से सुरक्षित रह सकते हैं।
इसी से संबंधित हार्वड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन में बताया कि ‘मेडिटेरियन डाइट’ न सिर्फ कैंसर और हृदय संबंधी समस्याओं से आपको सुरक्षित रखती है साथ ही गंभीर रोगों के कारण मृत्यु के खतरे को भी 23 प्रतिशत तक कम कर सकती है। महिलाओं के लिए इस प्रकार के डाइट प्लान को काफी लाभप्रद पाया गया है।
क्या होता है ‘मेडिटेरियन डाइट’?
मेडिटेरियन डाइट में मुख्यरूप से प्लांट बेस्ड यानी पौधों पर आधारित चीजों और स्वस्थ वसा को शामिल किया जाता है। इस डाइट में आप अधिकतर सब्जियां, फल और साबुत अनाज खाते हैं। डाइट का पालन करने वालों को खाने में ऑलिव ऑयल के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। यह डाइट मुख्यरूप से नट्स-सीड्स, फल-सब्जियों, साबुत अनाज से भरपूर होता है। इसके अलावा कम मात्रा में मछली, मुर्गी, डेयरी उत्पाद, अंडों का कभी-कभार सेवन किया जा सकता है।
कई शोध बताते हैं कि हृदय रोग और कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों से बचे रहने के लिए इस डाइट प्लान से लाभ पाया जा सकता है।
शोध में क्या पता चला?
हार्वर्ड से संबंधित ब्रिघम एंड वुमेंस हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने 25,000 से अधिक अमेरिकी महिलाओं पर 25 वर्षों तक किए अध्ययन में ‘मेडिटेरियन डाइट’ को कई प्रकार से लाभकारी बताया है।
शोधकर्ताओं ने पाया जिन प्रतिभागियों ने इस प्रकार की डाइट का सेवन किया उनमें सभी कारणों से मृत्यु दर का जोखिम 23 प्रतिशत तक कम था। इतना ही नहीं ऐसे प्रतिभागियों में कैंसर और हृदय संबंधी रोगों का जोखिम भी कम था। शोध के निष्कर्ष के आधार पर वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर आप दीर्घायु होना चाहते हैं तो भी इस डाइट का पालन करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
शोध के निष्कर्ष जामा जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।
मेटाबॉलिज्म से संबंधित समस्याएं भी होती हैं कम
अध्ययन के लेखकों ने इस डाइट के दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ की जांच की जिनमें पाया गया कि मेटाबॉलिज्म में सुधार करने से लेकर शरीर में इंफ्लामेशन के बायोमार्कर को कम करने में भी इससे विशेष लाभ पाया जा सकता है। प्रतिभागियों में ट्राइग्लिसराइड, फैट और इंसुलिन प्रतिरोध में भी सुधार देखा गया जो दो बड़ी बीमारियों- हृदय रोग और डायबिटीज का प्रमुख कारक माने जाते हैं।
लेखकों ने यह भी उल्लेख किया है कि जैसे-जैसे इस डाइट प्लान की अवधारणा लोकप्रिय होती जा रही है, कई देशों ने इसे बड़े उत्साह के साथ अपनाया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वीडन स्थित उप्साला यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता और अध्ययन के प्रमुख लेखक शफकत अहमद कहते हैं, हमारा शोध महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रकाश डालता है। मेटाबॉलिज्म स्वास्थ्य में सुधार से सूजन, ट्राइग्लिसराइड, मोटापा और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी दिक्कतों को कम किया जा सकता है। इस डाइट प्लान को मेटाबॉलिज्म के लिए विशेष लाभकारी पाया गया है।
हालांकि यहां ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी डाइट प्लान को अपनाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले लें। सेहत और शारीरिक स्थितियों के आधार पर सभी लोगों के लिए एक ही तरह की डाइट फायदेमंद हो, ये जरूरी नहीं है।













