नई दिल्ली:– नक्सलवाद के समूल उन्मूलन की तय समय-सीमा नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ में सुरक्षा एजेंसियों ने अभियान और तेज कर दिया है। केंद्र सरकार ने राज्य के छह जिलों को नक्सल प्रभावित की श्रेणी में रखा है, जिनमें कांकेर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा और गरियाबंद शामिल हैं। हालांकि बस्तर संभाग में अब नक्सल प्रभाव सीमित होकर पांच जिलों तक रह गया है।
कांकेर में अंतिम चरण की कार्रवाई
कांकेर जिले में सुरक्षा बलों ने बीते एक साल में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक बढ़त बनाई है। वर्ष 2025 में 51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 10 नक्सली अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए। इसके बावजूद कांकेर को अब भी नक्सल प्रभावित माना जा रहा है, क्योंकि जंगलों में सीमित संख्या में हथियारबंद नक्सली अब भी सक्रिय हैं।
जंगलों में बचे हैं 24 हथियारबंद नक्सली
कांकेर के एसपी निखिल राखेचा के अनुसार जिले के जंगलों में फिलहाल करीब 24 नक्सली मौजूद हैं। इनमें डीवीसीएम रैंक का इनामी नक्सली चंदर कत्लाम भी शामिल है, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित है। उसके साथ एसीएम रूपी भी सक्रिय बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक इस दल के 11 नक्सली कंपनी नंबर 5 से जुड़े हैं, जबकि बाकी परतापुर और रावघाट एरिया कमेटी के सदस्य हैं।
गढ़चिरौली एनकाउंटर के बाद भी दबाव कायम
हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुई मुठभेड़ में कांकेर में सक्रिय नक्सली फागू मारा गया था, जो कंपनी नंबर 5 का कमांडर था। उसके मारे जाने के बाद पुलिस को उम्मीद थी कि बाकी नक्सली सरेंडर करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते अब क्षेत्र में फिर से सघन सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
सीमावर्ती इलाकों में जारी लुकाछुपी
कांकेर की सीमा माड़ क्षेत्र और गढ़चिरौली से लगती है। दबाव बढ़ने पर नक्सली कभी नारायणपुर तो कभी महाराष्ट्र की ओर भागते रहे हैं, लेकिन अब संयुक्त ऑपरेशन के कारण उनकी आवाजाही भी मुश्किल होती जा रही है। फोर्स की रणनीति से नक्सलियों की घेराबंदी लगभग पूरी मानी जा रही है।
बदले की भावना से सक्रिय कुछ नक्सली
सूत्रों के अनुसार कुछ नक्सली अपने मारे गए साथियों का बदला लेने की नीयत से अब भी जंगलों में डटे हुए हैं। इनमें एसीएम रूपी का नाम प्रमुख है, जो कुख्यात नक्सली विजय रेड्डी की पत्नी बताई जाती है। विजय रेड्डी को पिछले साल मोहला-मानपुर के जंगलों में मुठभेड़ में ढेर किया गया था।
31 मार्च 2026 से पहले खत्म होगा नक्सलवाद
एसपी निखिल राखेचा ने स्पष्ट किया है कि यदि शेष नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहते हैं तो उनके लिए दरवाजे खुले हैं, लेकिन ऐसा न करने पर सुरक्षा बल कार्रवाई जारी रखेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि 31 मार्च 2026 से पहले कांकेर समेत पूरे क्षेत्र से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।













