नई दिल्ली:– पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गरमाने लगी है। चुनाव आयोग आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला है, जिसमें पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म होने वाला है, इसलिए उससे पहले राज्य में चुनाव कराए जाने हैं। आगामी चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी के खिलाफ रणनीति बनाने में भाजपा जुटी हुई है। इस बार भाजपा बंगाल में सरकार बनाने का दावा कर रही है।
रणनीति में बदलाव के संकेत
पश्चिम बंगाल को फतह करने के लिए भाजपा ने इस बार खास रणनीति तैयार की है। पार्टी अपने राजनीतिक हमलों के तरीके में बदलाव करती नजर आ रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी पर सीधे हमले किए थे, लेकिन उससे अपेक्षित चुनावी फायदा नहीं मिला और कुछ मामलों में इसका उल्टा असर भी देखने को मिला।
सीधे ममता बनर्जी पर हमला नहीं
पिछले चुनाव के अनुभव को ध्यान में रखते हुए भाजपा इस बार सीधे ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत हमला करने से बच सकती है। इसके बजाय पार्टी टीएमसी सरकार के कामकाज, भ्रष्टाचार के आरोपों और प्रशासनिक फैसलों को चुनावी मुद्दा बनाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीति के जरिए भाजपा ममता बनर्जी को व्यक्तिगत सहानुभूति मिलने से रोकना चाहती है और चुनावी बहस को सरकार के प्रदर्शन पर केंद्रित रखना चाहती है।
बताया जा रहा है कि भाजपा नेता चुनाव प्रचार के दौरान टीएमसी सरकार की नीतियों और कामकाज पर जमकर सवाल उठाएंगे, लेकिन सीधे ममता बनर्जी को निशाना बनाने से बचेंगे। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की पहली उम्मीदवार सूची भी जल्द जारी हो सकती है।
मोदी की रैली से चुनावी बिगुल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में आयोजित एक बड़ी रैली के साथ बंगाल में चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी है। दिलचस्प बात यह रही कि अपने भाषण में उन्होंने ममता बनर्जी का नाम लिए बिना ही राज्य सरकार की नीतियों और कामकाज पर तीखे सवाल उठाए।
2021 के अनुभव से सबक
सूत्रों के मुताबिक भाजपा को लगता है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने अपने खिलाफ हो रहे सीधे हमलों को राजनीतिक सहानुभूति में बदल लिया था। उस समय भाजपा नेताओं द्वारा किए गए तीखे हमलों को उन्होंने अपने पक्ष में इस्तेमाल किया था।
इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने इस बार रणनीति बदली है। पार्टी अब सीधे ममता बनर्जी को निशाना बनाने के बजाय राज्य सरकार की नाकामियों, विकास से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक फैसलों को चुनावी बहस का केंद्र बनाना चाहती है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व जहां संयमित भाषा का इस्तेमाल करेगा, वहीं राज्य स्तर के भाजपा नेता टीएमसी सरकार और ममता बनर्जी पर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाते रह सकते हैं। उनका कहना है कि स्थानीय नेताओं और जनता को राज्य की मौजूदा स्थिति का सीधा अनुभव है।












