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श्री राम ने चखें थे शबरी के झूठे बेर, कैसे पहुंचे प्रभु श्री राम शबरी के द्वार, पढ़ें यहां…..

NBTV24 by NBTV24
January 22, 2024
in आज, मध्यप्रदेश
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*मध्यप्रदेश:-* वनवास के दौराम जब रावण सीता माता रका हरण कर उन्हें लंका ले जाता है तो भगवान राम और लक्ष्मण जी सीता माता को ढूंढते हुए दंडकारण्य वन में पहुंते वहां से शबरी माता के आश्रम में पहुंच जाते हैं.*कौन थीं शबरी ?*पौराणिक कथा के अनुसार माता शबरी माता का असली नाम श्रमणा था. ये भील सामुदाय के शबर जाति से संबंध रखती थीं. इसी कारण कालांतर में उनका नाम शबरी हुआ. शबरी के पिता भीलों के मुखिया थे. उन्होंने शबरी का विवाह भील कुमार से तय कर दिया. शादी से पहले कई भेड़-बकरियों को बलि के लिए लाया गया, जिन्हें देखकर शबरी का मन विचलित हो उठा, क्योंकि उन्हें बेजुबान जानवरों से बेहद लगाव था. निर्दोष जानवरी की हत्या को रोकने के लिए शबरी विवाह से एक दिन पूर्व घर से भागकर जंगल चली गईं और सभी जानवरों को बचा लिया.शबरी घर से भागकर दंडकारण्य वन में पहुंची और वहां मातंग ऋषि की सेवा करने लगी. भील जाती की होने के कारण शबरी आश्रम में छिपकर सेवा करती थी. एक दिन शबरी की सेवा भावना देखकर मुनिवर अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने आश्रम में शबरी को शरण दे दी. उन्होंने मातंग ऋषि से ही धर्म और शासत्र का ज्ञान प्राप्त किया. मातंग ऋषि ने ही शबरी को श्रीराम की भक्ति करने को कहा. इसीलिए एक दिन जब ऋषि मातंग को लगा कि उनका अंत समय निकट है तो उन्होंने शबरी से कहा कि वे अपने आश्रम में ही प्रभु श्री राम की प्रतीक्षा करें. वे एक दिन अवश्य ही उनसे मिलने आएंगे और उसके बाद ही तुम्हें मोक्ष प्राप्त होगा. शबरी प्रतिदिन अपनी कुटिया के रास्ते में आने वाले पत्थरों और कांटों को हटाने लगीं, ताकि श्रीराम के आगमन के लिए मार्ग सुलभ हो जाए. रोज ताजे फल और बेर तोड़कर श्रीराम के लिए रखती.माता सीता की खोज में जब श्रीराम और लक्ष्मण जी शबरी की कुटिया पहुंते तो वह भाव विभोर हो गईं और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे.मान्यता है कि शबरी ने श्रीराम को स्वयं चखकर सिर्फ मीठे बेर खिलाये, जिसे भगवान राम ने शबरी की भक्ति को देखकर प्रेम से खाया. शबरी की भक्ति देखकर श्रीराम ने उन्हें मोक्ष प्रदान किया। आज भी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है. साल 2024 में शबरी जयंती की सप्तमी तिथि 2 मार्च, 2024 को सुबह 7:53 बजे से शुरू होकर 3 मार्च, 2024 को सुबह 8:44 बजे समाप्त होगी.शबरी जी का आश्रम छत्तीसगढ़े के शिवरीनारायण में है।

Tags: *Shri Ram had tasted the false berries of Shabarihow Lord Shri Ram reached the door of ShabariIndiaToday latest news
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