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बारिश की हर बूंद बचाने में प्रदेश देश में नंबर-1, टॉप 10 में 5 जिले PM के सामने CM साय ने बताया ये मॉडल…

NBTV24 by NBTV24
September 3, 2026
in छत्तीसगढ़
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नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा प्रदेश: मुख्यमंत्री साय…
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छत्तीसगढ़:- सुषमा स्वराज भवन में जल शक्ति मंत्रालय की विभागीय समिट के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नए प्रयोगों और जन-भागीदारी वाली पहलों के बारे में जानकारी दी. समिट के कैच द रेन सेशन के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पीने के पानी के स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कामों का विस्तार से ब्योरा दिया. इस सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए.

खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि, छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है. किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है. सीएम ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं. इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है. किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है. यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है. देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ जल संचय जन भागीदारी अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है. यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है.

कोरिया से निकला 5 प्रतिशत मॉडल
मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए 5 प्रतिशत मॉडल का विशेष उल्लेख किया. यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है. इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं. इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके.

मॉडल की विशेषता
इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं. किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है. जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं.

JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम
जल शक्ति मंत्रालय के जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है. पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है. जल संचय जन भागीदारी अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं. इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा. दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं. इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है. इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया. अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है. इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का काम पूरा हो चुका है.

छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में
राज्य-स्तर की उपलब्धियों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के जिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है. जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदा बाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के टॉप 10 जिलों में शामिल हुए हैं. इन जिलों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) के प्रयास किए गए हैं. स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार जल संरचनाओं के निर्माण के साथ-साथ जन-भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया गया है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि जब सरकारी योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य को भी एक जन-आंदोलन में बदला जा सकता है.

राज्य में पानी बचाने की कोशिशों के अच्छे नतीजे मिल रहे हैं. छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉक की संख्या 26 से घटकर 19 हो गई है. इसके अलावा पांच क्रिटिकल ब्लॉक के सामान्य श्रेणी में आने की उम्मीद है. भूजल स्तर को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार जल संचयन संरचनाओं के निर्माण, पुराने जल स्रोतों के जीर्णोद्धार, भूजल पुनर्भरण, जल निकायों की मैपिंग और स्थानीय स्तर पर नियमित निगरानी पर जोर दे रही है. छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैच द रेन पहल यानी जहां बारिश हो, वहीं पानी को संचित करना को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाकर लागू किया है. राज्य की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए, अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों और पानी की उपलब्धता के आधार पर जल संचयन और भूजल पुनर्भरण संरचनाएं विकसित की जा रही हैं.

मुख्यमंत्री साय ने दिए कई सुझाव
मुख्यमंत्री साय ने देशव्यापी जल संरक्षण अभियान को और असरदार बनाने के लिए सम्मेलन में कई अहम सुझाव भी दिए. उन्होंने प्रस्ताव दिया कि हर राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति, बारिश के पैटर्न, भूजल की स्थिति और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से एक अलग कैच द रेन प्लान (Catch the Rain Plan) तैयार करे. इससे जल संरक्षण के लिए राज्य-विशेष लक्ष्य और रणनीतियाँ तय करना आसान हो जाएगा. उन्होंने अच्छा काम करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य जल पुरस्कार शुरू करने का सुझाव दिया. इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने BISAG-N के ज़रिए जल संरचनाओं की मैपिंग की व्यवस्था को मजबूत करने और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन महीने में अभियान की प्रगति की समीक्षा करने की भी सिफारिश की.

दो करोड़ नई जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य
31 मई, 2027 तक पूरे देश में 2 करोड़ नए जल-संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इस बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में छत्तीसगढ़ का जन-भागीदारी मॉडल अहम भूमिका निभा सकता है. यह मॉडल दिखाता है कि जल संरक्षण का मतलब सिर्फ संरचनाएं बनाना नहीं है, यह सरकार, किसानों, पंचायतों और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. खेती की जमीन के एक छोटे से हिस्से को जल भंडारण के लिए अलग रखने से शुरू हुई यह पहल भविष्य में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़े अभियान की नींव बन सकती है. इस सम्मेलन में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिनमें मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो शामिल थे.

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