नई दिल्ली:– वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार अपना 9वां बजट पेश करने जा रही हैं। मोदी सरकार 3.0 के इस तीसरे पूर्ण बजट से देश को काफी उम्मीदें हैं। 7.4 प्रतिशत की विकास दर के लक्ष्य और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, इस जटिल बजट को आकार देने के पीछे वित्त मंत्रालय के 7 अनुभवी नौकरशाहों की एक मजबूत टीम काम कर रही है।
अनुराधा ठाकुर (आर्थिक मामलों की सचिव)
बजट की ‘मुख्य वास्तुकार’ कही जाने वाली अनुराधा ठाकुर हिमाचल प्रदेश कैडर की 1994 बैच की IAS अधिकारी हैं। इस विभाग का नेतृत्व करने वाली वह पहली महिला अधिकारी हैं।
भूमिका: संसाधनों का आवंटन और बजट दस्तावेजों को अंतिम रूप देना।
- अरविंद श्रीवास्तव (राजस्व सचिव)
कर प्रस्तावों (टैक्स स्लैब, जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स) का पूरा जिम्मा अरविंद श्रीवास्तव के पास है।
भूमिका: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का प्रबंधन। पीएमओ में काम करने का अनुभव रखने वाले श्रीवास्तव से इस बार ‘टीडीएस युक्तिकरण’ की बड़ी उम्मीदें हैं।
- वुमलुनमंग वुअलनाम (व्यय सचिव)
इन्हें ‘खजाने का संरक्षक’ माना जाता है।
भूमिका: सरकारी खर्च और सब्सिडी पर नियंत्रण रखना। राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने और सरकारी योजनाओं के लिए फंड मैनेज करने की जिम्मेदारी इन्हीं की है।
- एम नागराजू (वित्तीय सेवा सचिव)
देश के बैंकिंग और बीमा क्षेत्र की सेहत नागराजू के हाथों में है।
भूमिका: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और पेंशन प्रणालियों की निगरानी। वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करना।
- अरुणिष चावला (दीपम सचिव)
विनिवेश (Disinvestment) और निजीकरण के लक्ष्यों को पूरा करना इनका मुख्य कार्य है।
भूमिका: सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर गैर-कर राजस्व जुटाने का लक्ष्य हासिल करना।
- के मोसेस चालई (सार्वजनिक उद्यम विभाग सचिव)
भूमिका: सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के पूंजीगत व्यय और संपत्तियों के मौद्रिकरण (Asset Monetization) की योजना बनाना। यह सुनिश्चित करना कि बजटीय आवंटन का सही उपयोग हो।
- वी अनंत नागेश्वरन (मुख्य आर्थिक सलाहकार)
बजट से ठीक पहले आने वाले आर्थिक सर्वेक्षण के पीछे का मुख्य दिमाग डॉ. नागेश्वरन का ही है।
भूमिका: विकास दर का पूर्वानुमान लगाना और वैश्विक जोखिमों के प्रति वित्त मंत्री को सतर्क करना।













