नई दिल्ली : मशहूर गायिका अलका याग्निक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि उनके सुनने की क्षमता कम हो गई है। उनमें दुर्लभ सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस नामक समस्या का निदान किया गया है। पोस्ट में गायिका ने बताया कि उन्हें ये समस्या वायरल संक्रमण के कारण हुई जिसके कारण अब कम सुनाई देता है।
सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस अक्सर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा माना जाता रहा है। हालांकि जीवनशैली और कुछ पर्यावरणीय स्थितियों के कारण आप कम उम्र में भी इसके शिकार हो सकते हैं। आंतरिक कान या श्रवण तंत्रिका की संरचनाओं में होने वाली क्षति की इस समस्या का जोखिम किसी को भी हो सकता है।
डॉक्टर कहते हैं, कान काफी संवेदनशील अंग हैं जिनको लेकर आपको विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, हालांकि युवाओं में बढ़ती एक गड़बड़ आदत ने इसका खतरा काफी बढ़ा दिया है। आइए जानते हैं कि कम सुनाई देने की ये समस्या क्यों होती है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है?
पहले समझिए क्या है सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस?
हमारा कान कई प्रकार की संवेदनशील तंत्रिकाओं से घिरा होता है। इनमें होने वाली किसी भी प्रकार की समस्या न सिर्फ सुनने की क्षमता को बाधित कर देती है साथ ही इससे शारीरिक संतुलन में समस्या सहित कई और भी दिक्कतें हो सकती हैं।
उम्र बढ़ने के साथ कानों में कुछ प्रकार के संक्रमण, आनुवंशिक कारक सहित तेज आवाज के अधिक संपर्क में रहने के कारण आपकी सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। कम उम्र में बढ़ती इस समस्या के लिए मुख्यरूप से ईयरफोन-हेडफोन से तेज आवाज में संगीत सुनने को प्रमुख कारक माना जाता है।
तेज आवाज से कानों को होता है नुकसान
हमारे आंतरिक कान के अंदर स्टीरियोसिलिया नामक हिस्सा होता है जिसमें छोटे-छोटे बाल होते हैं। यही बाल ध्वनि तरंगों से कंपन को तंत्रिका संकेतों में परिवर्तित करते हैं जिन्हें आपकी श्रवण तंत्रिकाएं मस्तिष्क तक ले जाती है। आमतौर पर हमारे कानों की क्षमता कुछ घंटे तक 70-75 डेसिबल की आवाज सहन करने की होती है। वहीं जब आप 85 डेसिबल से अधिक तेज आवाज के संपर्क में आते हैं तो इन बालों को नुकसान हो सकता है जिससे एसएनएचएल का जोखिम बढ़ जाता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित ईएनटी विशेषज्ञ डॉ जाकिर.एम.खान बताते हैं, ईयरफोन का लंबे समय तक इस्तेमाल कानों के लिए हानिकारक है। वहीं अगर आप ऐसे हेडफोन-ईयरफोन्स का इस्तेमाल करते हैं जिससे कान पूरी तरह से कवर रहते हैं तो इससे कान में बाहरी हवा नहीं जा पाती है। रबर वाले इयरफोन प्लग के कानों में लगाने से संक्रमण का जोखिम रहता है।
कानों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए सबसे जरूरी है कि कानों को पूरी तरह से कवर करने वाले या तेज आवाज वाले इस तरह के उपकरणों के इस्तेमाल से बचा जाए।
हो सकता है बहरापन
कुछ स्थितियों में एसएनएचएल तीन दिनों के भीतर भी विकसित हो सकता है। एक लाख लोगों में से लगभग 5 से 20 लोगों को इस तरह के एसएनएचएल की समस्या हो सकती है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो एसएनएचएल तुरंत या कुछ दिनों में बहरेपन का भी कारण बन सकता है। यह अक्सर केवल एक कान को प्रभावित करता है और कई लोग सुबह उठने के बाद सबसे पहले इसे नोटिस करते हैं।
ईयरफोन्स के इस्तेमाल के अलावा सिर में चोट लगने, ऑटोइम्यूम रोग, मेनिएर्स रोग, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के साथ रक्त संचार संबंधी समस्याएं भी एसएनएचएल का कारण बन सकती हैं।






