गुरदासपुर: पंजाब में लगातार घटता जल स्तर चिंता का विषय बनता जा रहा है. इस वजह से राज्य सरकार लगातार लोगों से भूजल का दुरुपयोग नहीं करने की अपील कर रही है. वहीं इसके उलट गुरदासपुर जिले में कई ऐसे गांव हैं, जहां जमीन से अपने आप पाना निकलता है. जल का प्रकृति स्त्रोत है.यहां लोगों को 5 फीट से लेकर 30 फीट बोर करने पर पानी मिल जाता है. जल प्राप्त करने के लिए यहां लोगों को बिजली की आवश्यकता नहीं है.
यहां के किसान इसी पानी से खेती करते हैं. किसान ओंकार सिंह ने बताया कि, इस इलाके में सभी प्रकार की फसलें अच्छी होती हैं. उन्होंने बताया कि, उनके दादा ने बोर 1980 में लगाया था. आज उनकी चौथी पीढ़ी इसका इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि, इस इलाके के ज्यादातर किसान इसी बोर के पानी से खेती करते हैं.
ओंकार सिंह ने बताया कि, पानी का इस्तेमाल खेती करने के अलावा पीने के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है. यहां धान और गन्ना समेत कई फसलों की खेती की जा रही है. बोर 30 फीट गहरा है और 11 फीट से पानी आ रहा है. उन्होंने कहा कि, यह प्रकृति का ही जल स्त्रोत है. यह बोर बिना मोटर के चल रहा है.
अमित ठाकुर ने बताया कि 1985 में उनके बुजुर्गों ने इस गांव में 30 फीट का बोर खोदा था जहां से आज भी 24 घंटे पानी निकल रहा है. यह पानी बेहद शुद्ध है. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में चार-पांच अन्य ऐसे प्राकृतिक जल स्त्रोत हैं, जिनमें से 30-30 फीट बोर करने पर ही स्वच्छ पानी निकल रहा है. इस पानी का इस्तेमाल खेती और पीने के लिए भी किया जाता है. गुणवत्ता के लिहाज से यह पानी बिल्कुल शुद्ध है और इसे खेतों तक पहुंचाने में कोई खर्च नहीं आता. न बिजली का खर्च और न ही डीजल के लिए कहीं दौड़ना पड़ना है. यहां बिना किसी खर्च के खेतों तक पानी पहुंचाया जा रहा है.
अमित ठाकुर ने बताया कि जब किसानों को अपनी फसलों के लिए पानी की जरूरत होती है तो वे पाइप के जरिए खेतों में पानी पहुंचाते हैं और बाकी समय पानी प्राकृतिक चैनल के जरिए पास की नहर में पहुंचता है. इस क्षेत्र में पानी के कई प्राकृतिक स्रोत भी हैं, जिनसे अपने आप पानी बहता रहता है. इसे कुदरत का करिश्मा भी कहा जा सकता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यहां से कुछ दूरी पर व्यास नदी बहती है और इस क्षेत्र में पानी का दबाव अधिक होने के कारण जमीन समतल हो जाती है, जिससे पानी ऊपर की ओर उठने लगता है.
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ?
इस बारे में जब गुरदासपुर जिले के मुख्य कृषि अधिकारी अमरीक सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा, ‘यह एक प्राकृतिक स्रोत है, जहां से बिना बिजली और बिना इंजन के एक्वीफर पॉजिटिव प्रेशर के जरिए जमीन से पानी निकलता है. इसे हम प्राकृतिक स्रोत कह सकते हैं. उन्होंने अपील की है कि ऐसे स्रोतों को संरक्षित करने की जरूरत है. इस पानी को बिना इस्तेमाल के नहीं निकाला जाना चाहिए. बेशक यह शुद्ध पानी है, लेकिन फिर भी विभाग से जांच करवाकर इसे पीने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए.’उन्होंने कहा कि पठानकोट और गुरदासपुर में कई ऐसे गांव हैं जिनके अंदर एक परत है जहां से यह पानी सकारात्मक दबाव के माध्यम से बाहर आता है.













