दुर्ग : त्योहारी सीजन आते ही बाज़ार में खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ जाती है. जिससे मिलावटखोर और नकली उत्पाद बनाने वाले सक्रिय हो जाते हैं. दुर्ग जिले में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. जिले में नकली खाद्य पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. जिससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. प्रशासन की ओर से खाद्य एवं औषधि विभाग (फूड सेफ्टी ऑफिसर) द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है. लेकिन ठोस कदम न उठाए जाने के कारण यह समस्या पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाई है.मोबाइल यूनिट से भी जांच : मोबाइल यूनिट के माध्यम से तत्काल जांच कर संभावित नकली और मिलावटी पदार्थों की पहचान की जाती है.
इससे प्रशासन को मौके पर ही स्थिति का आकलन करने में मदद मिलती है.त्योहारी सीजन में सबसे ज्यादा मांग मिठाइयों की होती है, लेकिन इनमें सिंथेटिक रंग, खराब दूध और नकली खोवा मिलाकर मिठाइयां बेची जाती हैं. मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत सैंपल लेने और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान है. अगर किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट पाई जाती है, तो संबंधित विक्रेता और निर्माता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है.
होटलों से खाद्य विभाग की टीम ने लिए सैंपल ।खाद्य विभाग की टीम कर रही जांच : त्योहारों के सीजन में मिठाई, दूध, घी, तेल, मसाले और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ जाती है. जिसके कारण इनमें मिलावट की संभावना भी अधिक रहती है. जिला स्वास्थ्य अधिकारी मनोज दानी के मुताबिक फूड सेफ्टी टीम बाजारों में जाकर दुकानों से सैंपल इकट्ठा कर रही है और उन्हें जांच के लिए रायपुर की प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है.
त्योहारी सीजन में मिलावटी खाद्य सामग्री के खिलाफ एक्शन ।)अब तक 22 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. नकली खाद्य पदार्थों की जांच के लिए मोबाइल टेस्टिंग लैब भी सक्रिय है, जो जिले के अलग-अलग स्थानों पर जाकर खाद्य पदार्थों की जांच कर रही है- मनोज दानी, सीएमएचओ
होटल से लिए गए सैंपल
नकली पनीर को लेकर भी की गई जांच ।आपको बता दें कि मिलावटी खाद्य सामग्री बेचने पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द करना और जेल की सजा का प्रावधान है. दुर्ग जिले में नकली खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ती जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है. फूड सेफ्टी ऑफिसर बाजारों की निगरानी की जा रही है और सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं. मोबाइल टेस्टिंग लैब के माध्यम से भी त्वरित जांच की जा रही है. ठोस कार्रवाई की कमी के कारण ये समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है.ऐसे में जनता को भी सतर्क रहना होगा और मिलावटी उत्पादों की पहचान कर उन्हें खरीदने से बचना होगा. प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयास से ही इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है.








