नई दिल्ली:–‘लोकतंत्र के महापर्व में मतदान को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने इस बार पूरी तरह से कमर कस ली है। चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही तमिलनाडु से लेकर पश्चिम बंगाल तक सुरक्षा के इंतजाम और नियमों को और भी सख्त कर दिया गया है।
आयोग का मुख्य उद्देश्य है कि हर मतदाता का वोट पूरी तरह सुरक्षित रहे और मतदान की प्रक्रिया में कोई भी बाहरी तत्व या शरारती तत्व अड़ंगा न डाल सके। इसी कड़ी में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की सुरक्षा को लेकर कुछ ऐसे नए दिशा-निर्देश आए हैं, जो हर उम्मीदवार और पार्टी कार्यकर्ता के लिए एक बड़ी चेतावनी की तरह हैं।
ईवीएम बटन पर इत्र या स्याही लगाने पर होगी जेल
चुनाव आयोग ने सभी पीठासीन अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि ईवीएम के बटनों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अक्सर ऐसी शिकायतें आती रही हैं कि किसी खास उम्मीदवार के बटन पर गोंद, टेप या कोई अन्य सामग्री लगा दी जाती है जिससे मतदान में बाधा आती है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी बटन को ढका गया या उस पर स्याही और इत्र जैसा कोई भी रसायन पाया गया, तो उसे सीधे तौर पर चुनावी अपराध माना जाएगा। ऐसा करना न केवल वोट की गोपनीयता को भंग करने की कोशिश है, बल्कि यह मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप भी है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर अब बिना किसी देरी के सख्त आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा।
गड़बड़ी मिली तो पूरे बूथ पर दोबारा मतदान
चुनाव आयोग ने केवल व्यक्तिगत सजा का ही प्रावधान नहीं किया है, बल्कि मतदान की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पुनर्मतदान का सबसे बड़ा हथियार भी तैयार रखा है। पीठासीन अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे हर समय मशीनों की बारीकी से निगरानी करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सेक्टर अधिकारियों या रिटर्निंग अधिकारियों को दें।
यदि आयोग को जांच में यह लगता है कि किसी मतदान केंद्र पर ईवीएम के साथ बड़े स्तर पर छेड़छाड़ हुई है, तो वहां के पूरे मतदान को रद्द कर दोबारा वोटिंग कराई जा सकती है। यह कड़ा कदम इसलिए उठाया गया है ताकि किसी भी तरह की चालाकी के दम पर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिशों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
बाहरी नेताओं को अब छोड़ना होगा चुनावी मैदान
सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए पश्चिम बंगाल और तमिलनाडू के निर्वाचन अधिकारियों ने भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। नियम के मुताबिक, मतदान शुरू होने से ठीक 48 घंटे पहले उन सभी राजनीतिक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्वाचन क्षेत्र से बाहर जाना होगा जो वहां के पंजीकृत मतदाता नहीं हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि प्रचार का समय खत्म होते ही बाहरी लोगों की मौजूदगी को अवैध माना जाएगा ताकि मतदान के दिन किसी भी तरह का बाहरी दबाव या अशांति पैदा न हो सके। अधिकारियों को भी सख्त हिदायत दी गई है कि इस नियम के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही या पक्षपात होने पर उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वोटरों के लिए बूथ पर मिलेंगी खास सुविधाएं
सुरक्षा के साथ-साथ आयोग ने आम मतदाताओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए भी कई बड़े इंतजाम किए हैं। राज्य में बनाए गए हजारों मतदान केंद्रों पर पीने के पानी, शौचालय, छायादार वेटिंग एरिया और रोशनी की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए कतारों में बैठने की खास सुविधा और रैंप का इंतजाम किया गया है ताकि उन्हें वोट डालने में कोई परेशानी न हो।
इसके साथ ही हर बूथ पर वोटर असिस्टेंस बूथ बनाए गए हैं जहां लोग अपनी केंद्र संख्या और क्रम संख्या की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर बूथ के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा और उसे बाहर जमा करने की व्यवस्था भी की गई है।












