मध्य प्रदेश:– तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने जा रहे मतदान से पहले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर बगावत और क्रॉस वोटिंग का डर इस कदर हावी हो गया है कि अब विधायकों को राज्य से बाहर सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट करने की कवायद तेज हो गई है। भाजपा की अंदरूनी चक्रव्यूह रचना और दिग्गजों की बयानबाजी के बीच कांग्रेस अपने कुनबे को बिखरने से बचाने के लिए ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ का सहारा लेने जा रही है। इसी कड़ी में सोमवार सुबह कांग्रेस के वरिष्ठ रणनीतिकार और भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद को एक विशेष जिम्मेदारी देकर दिल्ली रवाना किया गया है, जहां से वे सीधे दक्षिण भारत का रुख कर सकते हैं।
मसूद और चौधरी संभालेंगे कमान
मिली जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह भोपाल एयरपोर्ट से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व विधायक कुणाल चौधरी एक साथ विशेष विमान/फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुए। राजनैतिक सूत्रों का दावा है कि दिल्ली में आलाकमान से अंतिम हरी झंडी मिलने के बाद आरिफ मसूद सीधे तेलंगाना (हैदराबाद) के लिए कूच करेंगे। चूंकि तेलंगाना में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है, इसलिए पार्टी अपने विधायकों की बाड़ेबंदी के लिए इसे सबसे सुरक्षित और मुफीद जगह मान रही है।
विधायकों को दूसरे राज्य भेजने की जरूरत क्यों?
बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के बाकी विधायकों को एक साथ विशेष चार्टर्ड प्लेन से तेलंगाना भेजने से पहले वहां ठहरने, सुरक्षा व्यवस्था और गोपनीयता सुनिश्चित करने (लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट) के लिए आरिफ मसूद को ‘एडवांस टीम’ के तौर पर भेजा गया है। भाजपा नेताओं द्वारा लगातार दी जा रही चुनौतियों और नामांकन के कुछ घंटों में तीसरे उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। जिसके बाद से ही पीसीसी (PCC) अध्यक्ष जीतू पटवारी और अन्य दिग्गजों की चिंताएं बढ़ गई थीं।
संख्या बल के लिहाज से 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास अपनी प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को जिताने के लिए 64 वोट मौजूद हैं, जो जीत के कोटे से ज्यादा हैं। लेकिन पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं द्वारा नटराजन के नाम पर अंदरखाते किए जा रहे विरोध और शनिवार को विधायक दल की बैठक से कमलनाथ सहित 4 विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी आलाकमान को चौंका दिया था।
क्रॉस वोटिंग रोकने का आखिरी हथियार
राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि विधायकों को भोपाल या मध्य प्रदेश में ही खुला छोड़ दिया गया, तो मतदान के दिन यानी 18 जून तक बीजेपी के रणनीतिकार असंतुष्टों में सेंध लगा सकते हैं। इसी ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ और प्रलोभन से अपने विधायकों को दूर रखने के लिए कांग्रेस अब उन्हें दक्षिण भारत के आलीशान रिजॉर्ट में सुरक्षित रखने जा रही है, ताकि वोटिंग के दिन ही उन्हें सीधे विधानसभा लाया जा सके।









