नई दिल्ली:– होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच रहा है. खासतौर पर पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर की कीमत और सप्लाई दोनों बिगड़ चुकी हैं. जहां भारत में आम तौर पर 30 दिन के भीतर सिलेंडर मिल जाता है, वहीं पाकिस्तान में हालात अलग हैं. वहां गैस मिलने में देरी, महंगाई और सप्लाई संकट ने लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है. आइए जानते हैं वहां असल स्थिति क्या है और सिलेंडर कितने दिन में मिल रहा है.होर्मुज तनाव का सीधा असर
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़े तनाव ने वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को प्रभावित किया है. ईरान द्वारा समुद्री रास्तों पर नियंत्रण और जहाजों की आवाजाही पर रोक के कारण मिडिल ईस्ट से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है. इसका असर पाकिस्तान जैसे देशों पर ज्यादा पड़ा है, जो एलपीजी के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं.पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतें बेकाबू
मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान पाकिस्तान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3,900 से 5,100 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई है. 11.67 से 11.8 किलोग्राम के सिलेंडर के लिए यह कीमत आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है. कई इलाकों में यह कीमत 5,100 रुपये के पार भी दर्ज की गई है, जिससे रसोई गैस एक बड़ा खर्च बन गई है.
सरकार द्वारा तय की गई कीमत और बाजार में बिक रही कीमत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. आधिकारिक तौर पर कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन असल में लोगों को सिलेंडर काफी महंगे दाम पर खरीदना पड़ रहा है. मार्च 2026 में औसत खुदरा कीमत करीब 4,139 PKR दर्ज की गई, लेकिन कई जगह इससे ज्यादा वसूली हो रही है.
कितने दिन में मिल रहा सिलेंडर?
भारत में जहां आमतौर पर 30 दिन के भीतर एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी हो जाती है, वहीं पाकिस्तान में यह समय तय नहीं है. बड़े शहरों जैसे कराची और लाहौर में प्राइवेट सप्लायर्स के जरिए कुछ दिनों में सिलेंडर मिल जाता है, लेकिन छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को कई बार 7 से 15 दिन या उससे और ज्यादा वक्त इंतजार करना पड़ रहा है. सप्लाई की अनिश्चितता के कारण यह समय और बढ़ भी सकता है.
कालाबाजारी और मुनाफाखोरी बढ़ी
सप्लाई कम होने और मांग ज्यादा रहने के कारण कालाबाजारी तेजी से बढ़ रही है. कई जगह डिस्ट्रीब्यूटर्स सीमित स्टॉक दिखाकर ऊंचे दाम वसूल रहे हैं. इससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. सरकार की निगरानी कमजोर होने के कारण इस पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो पा रहा है.
मुद्रास्फीति और रुपये की कमजोरी असर
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है. डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये की कमजोरी के कारण आयात महंगा हो गया है. इसके साथ ही बढ़ती महंगाई ने एलपीजी की कीमतों को और ऊपर धकेल दिया है. यानी अंतरराष्ट्रीय संकट के साथ घरेलू आर्थिक हालात भी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं.













