नई दिल्ली :– मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी को लेकर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा द्वारा लगाए गए आरोपों को भारत सरकार ने खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि यह पूर्व मंत्री की व्यक्तिगत राय है और इसका वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि भारत और जापान के बीच हाई-स्पीड रेल परियोजना पर बातचीत सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ रही है तथा निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जापान की ओर से E20 सीरीज की बुलेट ट्रेनें 2030 के शुरुआती वर्षों में उपलब्ध कराई जाएंगी। तब तक परियोजना की शुरुआत भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से करने पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है।
सिग्नलिंग सिस्टम को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी विदेश मंत्रालय ने जवाब देते हुए कहा कि सभी उपकरणों का ऑर्डर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दिया गया है और इस संबंध में जापान की ओर से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ था।
दरअसल, पूर्व जापानी मंत्री हिदेकी माकिहारा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर दावा किया था कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी के लिए भारतीय अधिकारी जिम्मेदार हैं और बातचीत के दौरान कई वादे पूरे नहीं किए गए। उन्होंने परियोजना में देरी की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष पर डाली थी।
गौरतलब है कि 508 किलोमीटर लंबा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है। जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित इस परियोजना को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) वित्तीय सहायता दे रही है। योजना के अनुसार ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी और मुंबई से अहमदाबाद की दूरी लगभग 2 घंटे 7 मिनट में तय होगी।
सरकार के अनुसार परियोजना के पहले चरण में सूरत-बिलीमोरा सेक्शन पर 15 अगस्त 2027 से यात्री सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि शेष हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से चालू किया जाएगा।









