मध्यप्रदेश :– नि:संतान दंपतियों के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन इसमें इंतजार की कसक भी शामिल है। AIIMS भोपाल में प्रदेश का पहला सरकारी IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर पूरी तरह तैयार है। हाईटेक मशीनें स्थापित हो चुकी हैं और भ्रूण इंप्लांट करने वाले विशेषज्ञ एम्ब्रायोलॉजिस्ट की नियुक्ति भी हो गई है।
सारी सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद सेंटर अभी तक शुरू नहीं हो पाया है, क्योंकि संचालन के लिए जरूरी लाइसेंस नहीं मिल पाया है। संस्थान प्रबंधन के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
आधे खर्च में मिलेगा इलाज
अभी प्रदेश के हजारों दंपति हर साल निजी IVF सेंटरों का रुख करते हैं, जहां एक साइकिल का खर्च 1.5 से 3 लाख रुपए तक होता है। ऐसे में सरकारी स्तर पर शुरू होने वाला यह सेंटर ऐसे दंपतियों को बड़ी राहत देगा, क्योंकि यहां IVF का खर्च 50 से 75 हजार रुपए के बीच रहने की संभावना है, यानी निजी अस्पतालों के मुकाबले आधे से भी कम खर्च में सुविधा उपलब्ध होगी। दिल्ली और रायपुर के बाद यह देश का तीसरा सरकारी संस्थान होगा, जहां यह सुविधा मिलेगी।
हाईटेक सुविधाओं से लैस सेंटर
AIIMS भोपाल के इस सेंटर में आधुनिक प्रजनन तकनीकों की पूरी सीरीज उपलब्ध होगी, जिनमें IVF, ICSI, IUI और टेस्ट ट्यूब बेबी की सुविधा, एम्ब्रियो फ्रीजिंग और हाई-एंड इन्क्यूबेटर, एडवांस लैब और टेस्टिंग सिस्टम और डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए AI आधारित डिजिटल स्किल लैब शामिल है।
बढ़ती मांग, गिरती फर्टिलिटी
रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में पिछले 10 वर्षों में फर्टिलिटी रेट में करीब 12.8% की गिरावट दर्ज की गई है। हर साल करीब 10 हजार दंपती IVF का सहारा ले रहे हैं। युवा आबादी में भविष्य में कमी और बुजुर्गों की संख्या बढ़ने का अनुमान है। यह आंकड़े बताते हैं कि आने वाले समय में IVF जैसी तकनीकों की जरूरत और बढ़ेगी।
उम्र का असर और नियम सख्त
विशेषज्ञों के अनुसार IVF की सफलता महिला की उम्र पर निर्भर करती है, इसलिए समय पर इलाज जरूरी है। सरकार ने इसके लिए सख्त नियम भी तय किए हैं- इसमें महिला की अधिकतम उम्र 50 वर्ष और पुरुष की अधिकतम उम्र 55 वर्ष होनी चाहिए। एक बार में अधिकतम दो भ्रूण ट्रांसफर किए जाएंगे, साथ ही हर प्रक्रिया की रिपोर्टिंग भी अनिवार्य होगी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
डॉक्टरों का कहना है कि सही जीवनशैली अपनाकर कई मामलों में IVF की जरूरत टाली भी जा सकती है, जैसे मोटापा, PCOS और थायरॉयड जैसी समस्याओं का समय पर इलाज, तनाव कम करना, योग और प्राणायाम करना, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लेना।
AIIMS भोपाल का यह IVF सेंटर प्रदेश के हजारों दंपतियों के लिए उम्मीद की नई किरण है। अब नजर सिर्फ लाइसेंस मंजूरी पर टिकी है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, मध्यप्रदेश में पहली बार आम लोगों को सस्ती और आधुनिक प्रजनन सुविधा सरकारी स्तर पर मिल सकेगी।













