पटना : वक्फ संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा में पेश हो गया है. जेडीयू ने इसका खुलकर समर्थन किया. केन्द्रीय मंत्री व जेडीयू के कद्दावर नेता ललन सिंह ने संसद में साफ कहा कि हमलोग पूरी तरह से इसके समर्थन में हैं. हालांकि उन्होंने इस दौरान नीतीश कुमार के किए हुए कामों का बखान किया.
”नीतीश कुमार का सेक्युलरिज्म सिर्फ नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नीतियों और योजनाओं के रूप में धरातल पर दिखा है. उन्हें कांग्रेस से सेक्युलरिज्म का प्रमाणपत्र लेने की कोई जरूरत नहीं, उनकी नीतियां और उनके कार्य ही उनकी सबसे बड़ी पहचान हैं. बिहार में पिछले 20 वर्षों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं. जो देश के किसी भी अन्य राज्यों में देखने को नहीं मिली है.”- ललन सिंह, जेडीयू सांसद
JDU ने किया समर्थन : मतलब साफ है कि जेडीयू ने वक्फ संशोधन विधेयक पर बीजेपी का साथ तो दिया, पर स्टैंड भी क्लियर कर दिया. अल्पसंख्यकों के लिए किए गए कामों को संसद में गिना दिया. इसे कहते हैं एक तीर से दो निशाना, ‘काम भी बन जाए, कोई नाराज भी ना हो.’ इसके पीछे की वजह सामने बिहार में होने वाला विधानसभा चुनाव है.
बिहार में नीतीश कुमार पिछले 20 साल से शासन में है और अधिकांश समय भाजपा के साथ सरकार चलाते रहे हैं. अभी भी बीजेपी के साथ एनडीए की सरकार चला रहे हैं. नीतीश कुमार का विवादास्पद मुद्दों पर हमेशा बीजेपी से अलग रुख रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों से स्थितियां बदली है.
धारा 370, तीन तलाक, राम मंदिर निर्माण और अब वक्फ संशोधन विधेयक पर नीतीश कुमार ने यदि खुलकर समर्थन नहीं किया है तो खुलकर विरोध भी नहीं जताया है. वैसे इस बार वक्फ संशोधन विधेयक पर जेडीयू ने खुलकर सपोर्ट कर दिया है. अब ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि कहीं यह स्टैंड जेडीयू के लिए घातक ना साबित हो जाए.
”मुस्लिम नीतीश कुमार पर विश्वास करते हैं लेकिन वक्फ संशोधन बिल ऐसा सेंटीमेंटल मुद्दा हो गया है कि चुनाव में नीतीश कुमार को बीजेपी का साथ देने के कारण नुकसान उठाना पड़ेगा. बिहार में यह मुद्दा बनेगा और एनडीए के खिलाफ आरजेडी, कांग्रेस और प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज लाभ लेने की कोशिश करेगी.”- अरुण पांडे, राजनीतिक विशेषज्ञ
वहीं राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडे भी कहते हैं कि नीतीश कुमार, बीजेपी के साथ रहते हुए भी हमेशा से अपने को अलग दिखाते रहे हैं. लेकिन वक्फ संशोधन विधेयक में जिस प्रकार से जेडीयू का स्टैंड रहा है उससे मुस्लिम खेमे में नाराजगी है. बिहार में 50 विधानसभा सीट हैं जिस पर मुस्लिम वोटर निर्णायक हैं. ऐसे में वक्फ विधेयक नीतीश कुमार की शर्तों और सुझाव के बाद भी मुश्किलें बढ़ा सकती हैं.
बिहार में 50 सीटों पर अल्पसंख्यकों का दबदबा : आइये सबसे पहले आपको बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से उन 50 सीटों के बारे में बताते हैं, जहां मुस्लिम आबादी मुख्य भूमिका में रहता है. बात सीमांचल की करते हैं, जहां किशनगंज की ठाकुरगंज, बहादुरगंज, कोचाधामन, किशनगंज, बनमनखी, बायसी सीट है. वहीं कटिहार की बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी, बरारी और कदुवा सीट है. अररिया की नरपतगंज, रानीगंज, पूर्णिया की कसबा, धमधाहा, कोढा सीट शामिल है.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ सीमांचल में मुस्लिमों का प्रभाव है. अगर मिथिलांचल की बात करें तो मधुबनी की विस्फी, जाले, दरभंगा की दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा शहरी, समस्तीपुर की मोहद्दीनगर, समस्तीपुर शहर, उजियारपुर विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में रहता है.
मिथिलांचल, सीमांचल के अलावा जिन जिलों में मुस्लिम हार-जीत तय करते हैं उसमें पूर्वी चंपारण की नरकटियागंज, ढाका, सिवान की सिवान, रघुनाथपुर, भागलपुर की भागलपुर, नाथनगर, कहलगांव और पीरपैंती सीट हैं. इसके साथ ही औरंगाबाद की इमामगंज, रफीगंज, गया की शेरघाटी, वजीरगंज, बेला और गया, बेगूसराय की साहेबपुर कमाल, तेघड़ा, मुंगेर की तारापुर, जमालपुर और मुंगेर टाउन, नालंदा की इस्लामपुर, हिलसा, बिहार शरीफ और राजगीर के अलावा पटना की दानापुर, फुलवारीशरीफ, पटना साहिब और बाकीपुर पर मुस्लिम हार और जीत तय करते हैं.
ये तो आप सीटों के हिसाब से जान लिए कि बिहार में किन-किन विधानसभा सीटों पर अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक पर भारी हैं. आइये अब आपको हम ग्राफिक्स के जरिए दिखाते हैं कि किस जिले में मुस्लिमों की कितनी आबादी है.
इस तरह से हमने आपको बिहार और उसमें मुस्लिम की भागीदारी पर सारी जानकारी दे दी. आइये फिर से आपको वक्फ संशोधन विधेयक के मसले पर विस्तार से बताते हैं. पिछले साल जब वक्फ संशोधन विधेयक लाया गया था तो उस समय केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने पार्टी की ओर से इसका जोरदार समर्थन किया और इसे मुसलमान के विरोध में नहीं बताया. इसके बावजूद मुस्लिम संगठनों ने नाराजगी जताते हुए नीतीश कुमार से मुलाकात की और संशोधन विधेयक में कई तरह की आपत्तियां दर्ज कराई.
जेडीयू नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार के दबाव के कारण ही जेपीसी का गठन करना पड़ा. जो भी आपत्तियां मुस्लिम संगठनों की थी, जिसे नीतीश कुमार से उन्होंने कहा था जेपीसी में रखा गया है. संशोधन विधेयक में आशंकाओं को दूर किया जाएगा.
”नीतीश कुमार किसी कीमत पर मुसलमान को नुकसान नहीं होने देंगे. वक्फ संशोधन विधेयक के माध्यम से पसमांदा और महिलाओं को लाभ मिलेगा.”- राजीव रंजन, राष्ट्रीय प्रवक्ता, जेडीयू
मुस्लिम संगठनों को जिन पर नाराजगी है उसमें से प्रमुख है:-
1.वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर यूनिफाइड वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 किया जाएगा.
- महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.
- वक्फ सर्वेक्षण के लिए डिप्टी कलेक्टर या उच्च अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी.
- वक्फ बोर्डों की संरचना में सुधार किया जाएगा, जिससे इसमें मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके.
- वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण को हटाने और उनके पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल और डेटाबेस बनाया जाएगा.
- ट्रिब्यूनल व्यवस्था में संशोधन कर इसे अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिसमें दो सदस्यीय ट्रिब्यूनल होंगे और उच्च न्यायालय में अपील की समय-सीमा 90 दिन निर्धारित की जाएगी.
- धारा 40 को हटाकर वक्फ बोर्ड को यह तय करने का अधिकार नहीं होगा कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं.
जेडीयू का दावा है कि नीतीश की तीन शर्त जो संशोधन में शामिल किया गया है:-
- जमीन राज्य का मामला है, लिहाजा नए कानून में भी यही प्राथमिकता बरकरार रहे.
- नया कानून पूर्वप्रभावी लागू नहीं होगा, बशर्ते कि वक्फ संपत्ति पंजीकृत हो. मतलब जो वक्फ संपत्तियां रजिस्टर्ड हैं, उन पर असर नहीं पड़ेगा. लेकिन कोई विवादित या सरकारी संपत्ति है, जो रजिस्टर्ड नहीं है, उसके भविष्य का फैसला वक्फ बिल में तय मानकों के हिसाब से होगा.
- अगर कोई वक्फ संपत्ति सरकारी जमीन पर है तो उसका फैसला भी बिल के मुताबिक होगा.
बता दें कि बिहार में 29000 एकड़ सुन्नी और सिया वक्फ बोर्ड के पास जमीन है. सुन्नी और सिया वक्फ बोर्ड में नीतीश कुमार के नजदीकी अध्यक्ष बने हुए हैं. शुरू में जब बिल आया उसी समय सिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के साथ विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने नीतीश कुमार से मुलाकात की. नीतीश कुमार ने ललन सिंह, जमा खान और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बैठक करने का निर्देश दिया .
नीतीश कुमार ने क्या-क्या किया?
- मुस्लिम संगठनों से मिले. सुझाव और पार्टी नेताओं से मंथन के बाद नीतीश ने सुझाव और शर्त रखी.
- नीतीश कुमार ने ईद में एक दर्जन से अधिक मुस्लिम के इबादत स्थल पर गए और बड़े नेताओं से मुलाकात की.
- जेपीसी के सुझाव के बाद फिर से संशोधन विधायक आने से पहले नीतीश कुमार पार्टी कार्यालय पहुंचे और भरोसा दिलाने की कोशिश की.









