कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले एक बड़ा राजनीतिक ड्रामा तब सामने आया जब हल्दिया की बीजेपी विधायक तापसी मंडल ने सोमवार को तृणमूल पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली. राजनीतिक विशेषज्ञ मंडल को विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी का करीबी मानते हैं. दोनों नेता पूर्व मेदिनीपुर से आते हैं. मंडल के साथ ही भाजपा नेता श्यामल मैती भी तृणमूल में शामिल हो गए. मैती पार्टी की राज्य समिति और जिला कोर समिति के सदस्य थे.सुबह बीजेपी विधायक के रूप में सदन पहुंचीः सूत्रों ने बताया कि तापसी मंडल रविवार को तृणमूल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी से मिलने कोलकाता पहुंचीं. सोमवार को मंडल विधानसभा सत्र में शामिल हुईं.
भाजपा विधायक के तौर पर विधायकों की उपस्थिति पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए. जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, वह तृणमूल कांग्रेस भवन गईं और राज्य के ऊर्जा मंत्री अरूप बिस्वास की मौजूदगी में सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गईं.पाला बदलने के बाद तापसी मंडल ने कहा, “मैंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विकास संबंधी पहलों का हिस्सा बनने का फैसला किया. भाजपा राज्य में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश कर रही है. मेरे लिए ऐसी राजनीति को स्वीकार करना मुश्किल हो रहा था.”क्यों बदला पालाः राजनीतिक जानकार इस कदम को मंडल के जिला अध्यक्ष पद से हटने की नाराजगी के तौर पर देखते हैं.
भाजपा ने अपने किसी भी विधायक को जिला इकाई का अध्यक्ष नहीं बनाने का फैसला किया था, जिसके बाद मंडल ने कथित तौर पर भगवा पार्टी छोड़ने और प्रतिद्वंद्वी खेमे में शामिल होने का फैसला किया. मंडल ने 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस समर्थित सीपीआई (एम) उम्मीदवार के रूप में हल्दिया सीट जीती थी. 2021 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले दिसंबर 2020 में अधिकारी के साथ भाजपा में शामिल हो गईं. 2021 में भाजपा के टिकट पर हल्दिया सीट को सफलतापूर्वक बरकरार रखा.एक्स पर एक स्वागत पोस्ट में, टीएमसी ने लिखा, “भाजपा की हल्दिया विधायक तापसी मोंडल का तृणमूल कांग्रेस परिवार में स्वागत है! हमारे साथ जुड़ने का उनका फैसला भाजपा की राजनीति से बढ़ते मोहभंग का प्रमाण है. @MamataOfficial के नेतृत्व में, वह लोगों के कल्याण के लिए अथक प्रयास करेंगी.”
टीएमसी में शामिल होने के बाद श्यामल मैती ने भी भाजपा पर हमला किया. उन्होंने कहा, “भारत एक बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक देश है। बंगाल उस परंपरा को आगे बढ़ाता है. लेकिन हमने देखा कि भाजपा का एक नेता हिंसक राजनीति करने की कोशिश कर रहा था. मैंने विपक्ष में रहते हुए भाजपा छोड़ दी.”पूर्व मेदिनीपुर किले में सेंधः टीएमसी इस दलबदल को 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अधिकारी के पूर्व मेदिनीपुर किले में एक बड़ी सेंध के रूप में देख रही है. हालांकि, मंडल टीएमसी में शामिल होने वाले पहले भाजपा विधायक नहीं हैं.
2021 के चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 77 सीटें जीतने के बाद उसके 12 विधायक टीएमसी में शामिल हो गए. भाजपा के दो सांसद भी टीएमसी में शामिल हो गए थे.विधायक खोने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा “मंडल के इस कदम का भाजपा पर कोई असर नहीं होगा. लोग ऐसे राजनीतिक अवसरवादियों को नकार देंगे. उनके साथ एक भी भाजपा कार्यकर्ता टीएमसी में शामिल नहीं हुआ है. यह अब चुनावी चलन है. लोग पार्टी बदलने वालों का समर्थन नहीं करते












